क्या आपने कभी आसमान की तरफ देखकर सोचा है कि आखिर इसके ऊपर क्या है? क्या आसमान के बाद सिर्फ तारे हैं या फिर कुछ और भी मौजूद है? इस वीडियो में हम पृथ्वी के वायुमंडल, अंतरिक्ष, सौरमंडल और विशाल ब्रह्मांड तक की यात्रा करेंगे। साथ ही जानेंगे कि पृथ्वी अंतरिक्ष से कैसी दिखाई देती है और इसे ब्लू प्लैनेट क्यों कहा जाता है।
वीडियो में क्या बताया गया है?
इस वीडियो में कुछ इन विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है:
- पृथ्वी के चारों ओर मौजूद वायुमंडल
- बादल, मौसम और हवाई जहाज कहां उड़ते हैं
- अंतरिक्ष की शुरुआत कहां से होती है
- सैटेलाइट और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)
- सौरमंडल और ग्रह
- ब्रह्मांड कितना बड़ा है
- पृथ्वी अंतरिक्ष से कैसी दिखाई देती है
पृथ्वी के ऊपर क्या है? (Quick Answer)
पृथ्वी के ऊपर सबसे पहले हवा की परत जिसे हम वायुमंडल (Atmosphere) कहते है, जिसमें ऑक्सीजन, बादल और मौसम की गतिविधियां होती हैं और इसके ऊपर से ही अंतरिक्ष (Space) शुरू हो जाता है जहां सैटेलाइट और अंतरिक्ष स्टेशन मौजूद हैं। इसके बाद सौरमंडल और फिर अरबों-खरबों सितारों तथा गैलेक्सियों से भरा विशाल ब्रह्मांड आता है जो अनंत तक फैल हुआ है।
पृथ्वी के ऊपर क्या है? वीडियो ट्रांसक्रिप्ट
दोस्तों क्या आपने कभी छत पर बैठकर आसमान को देखा है और सोचा है कि इस नीले आसमान के ऊपर आखिर है क्या।
हम जिस जमीन पर खड़े हैं अगर हम यहां से सीधे ऊपर की तरफ रॉकेट में बैठकर निकलें तो हमें क्या-क्या मिलेगा। क्या सिर्फ सितारे हैं या कुछ और भी।
ऐसे कई सारे सवाल मेरे दिमाग में आते थे और आपके भी दिमाग में आते होंगे। आज के इस वीडियो में हम पृथ्वी की परतों से लेकर ब्रह्मांड की गहराइयों तक का सफर तय करेंगे।
तो चलिए जानते हैं कि हमारी पृथ्वी ऊपर से आखिर दिखती कैसे है, क्या छिपा है।
सबसे पहले आती है हवा की परतें। इसे आप सुरक्षा कवच भी कह सकते हैं। सरल भाषा में कहें तो जैसे हम ठंड में रजाई ओढ़ते हैं वैसे ही पृथ्वी ने हवा की एक रजाई ओढ़ी हुई है।
इसमें ऑक्सीजन है जिससे हम सांस लेते हैं। यह आप जो देख रहे हैं ना चारों तरफ वो हवा में तैरती हुई बादल की परतें हैं। यानी कि यहीं पर बादल बनते हैं, बिजली कड़कती है और हवाई जहाज उड़ते हैं।
उसके बाद थोड़ा सा ऊपर आते हैं तो जैसे ही आप हवा की परतों को पार करेंगे लगभग 100 से 400 कि.मी के ऊपर वहां अंतरिक्ष शुरू हो जाता है। यहां कोई हवा नहीं होता।
यहां हमारे भेजे हुए सेटेलाइट्स घूम रहे होते हैं जिनकी वजह से आप अभी YouTube देख पा रहे हैं या इस वीडियो को देख रहे हैं और फोन में बात कर पाते हैं।
यहां आईएसएस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी है जहां वैज्ञानिक रहते हैं।
इसके बाद और थोड़ा ऊपर जाने पर हम अपने पड़ोसी से मिलते हैं। पड़ोसी से मिलने का मतलब है सोलर सिस्टम।
पृथ्वी के चारों तरफ जो भी ग्रह हैं उन सब से हम, उन सबको हम देख पाते हैं। सबसे पहले आता है चांद जो हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है। फिर आता है सूरज और बाकी के सात ग्रह जिसे मंगल, बृहस्पति आदि।
अगर सरल भाषा में कहें तो इसे आप अंतरिक्ष का मोहल्ला भी कह सकते हैं। इंग्लिश में इसे सोलर सिस्टम कहते हैं।
और वहीं पर सूरज से भी आगे निकलने पर हम देखेंगे कि यहां पर अरबोंखरबों में सितारे हैं और हमारे जैसे कई गैलेक्सीस हैं।
यह इतना बड़ा है कि आज तक कोई नहीं जान पाया है कि इसका अंत कहां है। इसे हम ब्रह्मांड कहते हैं।
और अगर पृथ्वी को बाहर से देखें तो देख सकते हो तो यह कुछ इस तरीके से दिखाई देता है। नीला ग्रह जिसे हम ब्लू प्लैनेट भी बोलते हैं।
इसकी 1/3 हिस्से में जो पानी है इसी वजह से यह नीला दिखाई देता है।
उम्मीद करता हूं कि आपको वीडियो पसंद आया होगा और समझ में आ गया होगा कि पृथ्वी इसके बाहर क्या है ऊपर से कैसे दिखता है।
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पृथ्वी को ब्लू प्लैनेट क्यों कहते हैं?
पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग पानी से ढका हुआ है, इसलिए अंतरिक्ष से यह नीले रंग की दिखाई देती है। इसलिए इसे नीला गृह यानि ब्लू प्लेनेट भी कहते है |
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अंतरिक्ष कहां से शुरू होता है?
अंतरिक्ष की शुरुआत आमतौर पर पृथ्वी से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर मानी जाती है। इस जगह को कार्मन रेखा (Kármán Line) कहा जाता है। यहां पहुंचने के बाद हवा बहुत कम रह जाती है, इसलिए सामान्य हवाई जहाज उड़ नहीं सकते। इसी वजह से दुनिया भर में इस सीमा को पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच की शुरुआत माना जाता है।
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क्या अंतरिक्ष में हवा होती है?
नहीं, अंतरिक्ष लगभग निर्वात (Vacuum) होता है जहां सांस लेने योग्य हवा नहीं होती।
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ब्रह्मांड कितना बड़ा है?
ब्रह्मांड इतना बड़ा है की साइंटिस्ट भी अभी तक इसका छोर नही ढूंड पाए है | अभी की बात करें तो यह अनंत तक फैला हुआ है |

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